Sunday, June 28, 2009

स्वाइन फ़्लू का साया

दुनिया भर के देशो में हड़कंप मचाने वाले स्‍वाइन फ्लू के भारत में अब तक करीब 800 मरीज पाए जा चुके है। अगस्त माह के पहले सप्ताह में तो भारत में जैसे स्वाइन फ़्लू के मरीज़ो की बाड़ सी आ गयी और प्रतिदिन करीब 50 या अधिक व्यक्ति स्वाइन फ़्लू के शिकार बने | भारत में अब तक दो व्यक्तियो की जिंदगी स्वाइन फ़्लू की भेट हो चुकी है | पहले 3 अगस्त को पुणे में एक 14 वर्षीय छात्रा इसकी शिकार बनी वही 8 अगस्त को मुंबई में एक 53 वर्षीय महिला ने स्वाइन फ़्लू के कारण दम तोड़ दिया | इसके साथ ही स्वाइन फ़्लू की रोकथाम के सारे इंतज़ामो की पोल खुल गयी| भारत के कई जिलो को महामारी से प्रभावित घोषित किया जा चुका है| इतना हि नही, मरीज़ो के उपचार में जुटे कई डाक्टर और नर्स भी स्वाइन फ़्लू की चपेट में हें| स्वाइन फ़्लू के संक्षिप्त इतिहास पर अगर नज़र डाले तो हम पाएँगे कि शुरूवाती लक्षणों के पाए जाने से सिर्फ़ 30 से 45 दिन के भीतर इसने न सिर्फ़ मौत से खेलना शुरू कर दिया, बल्कि दुनिया के कई देशो पर यह बीमारी एक साए की तरह छा गयी और स्वाइन फ़्लू का विषय दुनियाभर के टेलीविजन चैनलों और अखबारों की सुर्खियां का केंद्र बन गया| यह कहना ग़लत नही होगा कि आज पूरा विश्‍व स्वाइन फ़्लू के वाइरस से अछूता नही रह गया है। विश्व भर में स्वाइन फ्लू का खौफ स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता का विषय बन गया है। आप जानना नही चाहेंगे कि महामारी के रूप में दुनिया के दरवाजे पर दस्तक देने वाला स्वाइन फ़्लू आख़िर है क्या?

स्‍वाइन फ्लू - आख़िर क्या?

स्वाइन इंफ्लुएंजा (या स्वाइन फ्लू या हॉग फ़्लू या पिग फ़्लू ) सुअरों में होने वाला सांस संबंधी एक अत्यंत संक्रामक रोग है जो संक्रमण एच 1 एन 1 नामक घातक वायरस की वजह से फैलता है। स्वाइन फ़्लू सुअरो में पाए जाने वाली आम बीमारी है और यह मुल्यतह अमेरिका, मैक्सिको, कनाडा, युरोप (युनाइटेड किंग्डम, स्वीडन, इटली), पूर्वी एशिया (चीन, ताइवान, जापान) में पाए जाने वाले सुअरो की प्रजाति में पाई गयी है सामान्यतः यह रोग सिर्फ़ सुअरो में ही पाया गया है लेकिन इसका संक्रमण मनुष्यों में आरंभ हो गया है और इसने 21 वीं सदी की महामारी का रूप ले लिया है।

वाइरस की शुरुआत और सबसे प्रभावित देश
सबसे पहले इस बीमारी के लक्षण मैक्सिको के वेराक्रूज इलाके के एक पिग फार्म्स के आसपास रह रहे लोगों में पाए गए थे।स्वाइन फ़्लू का विषय तब अचानक से चर्चा का विषय बन गया जब अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की मैक्सिको यात्रा के दौरान उन्हें एक संग्रहालय का भ्रमण कराने वाले पुरातत्वविज्ञानी की ‘स्वाइन फ्लू’ से मृत्यु के बाद व्हाइट हाउस के डॉक्टरों ने स्वाइन विषाणु के संक्रमण की आशंका के मद्देनजर ओबामा की सघन स्वास्थ्य जांच की।
विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के मुताबिक अब तक दुनिया भर में स्वाइन फ़्लू के 162380 मामले सामने आए हें और अब तक 1154 लोगों की जान जा चुकी है। सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वेल देश अमेरिका और मेक्सिको हें जहाँ मरने वालो की संख्या 1000 का आँकड़ा पार कर चुकी है और करीब लगभग 168 देश स्वाइन फ्लू की चपेट में आ चुके है| विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के अनुसार, स्वाइन फ्लू से प्रभावित लोगों की संख्या कहीं ज़्यादा हो सकती है क्योंकि सबसे ज़्यादा प्रभावित देशो में सभी लोगों की जाँच नही हुई है|

स्वाइन फ़्लू और भारत

भारत में स्वाइन फ्लू का वाइरस जिस तेज़ी से फैल रहा है यह एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है| अब तक लगभग 800 व्यक्तियों में इसके पाए जाए जाने की पुष्टि अधिकारिक तौर पर हो चुकी है। सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले शहर हें - दिल्ली, पुणे, हैदराबाद, बॅंगलुर, जालंधर, चेन्नई, और गोआ और भी शहरों में इस वाइरस के पाए जाने की पुष्टि हो रही है| भारत सरकार नें इस वाइरस से निपटने के लिए काफ़ी कदम उठाए हें लेकिन अगस्त के प्रथम सप्ताह में हुई दो मौत यह दर्शाती हें की अभी तक किए गये प्रयास इस वायरस से बचाव में नाकाम ही साबित हुए हें| भारत सरकार को व्यापक स्तर पर स्वाइन फ्लू के उपचार की सुविधायें मौहय्या करनी होंगी जिससे आम आदमी को जल्दी से जल्दी इससे बचाव में मदद मिल सके| साथ ही साथ यह भी ज़रूरी है कि आम नागरिक स्वाइन फ़्लू के बारे में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करें जिससे इस वाइरस से आसानी से बचा जा सके| स्वाथ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक इस बीमारी से संक्रमित होने वाले लोगों में सबसे ज़्यादा 10 से 14 साल के बच्चे हैं.

यह आवश्यक हो गया है की सरकार, मीडीया जगत और स्वयं सेवी सँस्थाए एक साथ मिलकर इस वाइरस से बचाव के लिए काम करें| सरकार अधिक से अधिक सुविधायें जुटाने का काम करे जिससे प्रभावित लोगों का तुरंत इलाज हो सके, मीडीया समय-समय पर सार्वजनिक हित में घोषणाएं प्रसारित करें, ताकि लोगों को पता चल सके कि क्या सावधानियां बरतनी चाहिए और बीमारी के लक्षण क्या हैं। और स्वयं सेवी सँस्थाए लोगों से मिलकर एक जाग्रति अभियान चलायें जिससे खास तौर पर उन लोगों को फायदा होगा, जो गरीब हैं और जिनके पास पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं।


स्वाइन फ्लू के लक्षण
हालांकि इसके लक्षण एक सामान्य फ्लू के समान हैं, मगर लापरवाही बरतने पर वे गंभीर हो सकते हैं। आम तौर पर इन लक्षणों के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। और यह बीमारी इंसानों से इंसानों के बीच भी फैलती है, इसलिए यह जरुरी है कि लोग संक्रमण रोकथाम के सभी आवश्‍यक कदम उठाएं।स्वाइन फ्लू के लक्षण हें बुखार, खाँसी, सिरदर्द, कमजोरी और थकान, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, गले में ख़राश और नाक बहना

बचाव और बीमारी की रोकथाम के उपाय
खांसी अथवा छींक के समय अपने चेहरे को टिश्यू पेपर से ढककर रखें। टिश्यू पेपर को सही तरीके से फेंके अथवा नष्ट कर दें। अपने हाथों को किसी हैंड सैनीटाइजर द्वारा नियमित साफ करें। अपने आसपास हमेशा सफाई रखें।
चेहरे पर मास्क को बचाव का एक तरीका माना जा रहा है, मगर वास्तव में यह कितना प्रभावी है इस बारे में कोई पक्के नतीजे सामने नहीं आए हैं। यदि आपको फ्लू के लक्षण महसूस हो रहे हैं, भले ही आपने हाल में कोई यात्रा की हो या नहीं, तुरंत डाक्टर के पास जाएं। यदि टेस्ट रिपोर्ट पॉजीटिव आती है तो घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि फ्लू का एंटीवारयल ड्रग टैमीफ्लू के जरिए इलाज किया जा सकता है।

स्वाइन फ़्लू का अर्थव्‍यवस्‍था पर असर

जाहिर है कि स्‍वाइन फ्लू की वजह से देश का पर्यटन उद्योग प्रभावित होगा। नतीजतन धीमी चल रही अर्थव्‍यवस्‍था के और भी धीमे होने के आसार हैं।

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