आम बजट 2009-2010 - एक विश्लेषण
सबको आशा थी किसंयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार कि दूसरी पारी का पहला बजट मंदी से उबरने के लिए उद्योंगो की रियायतें बरकरार रखने व वित्तिय घाटे पर अंकुश रखने की चुनौती वाला होगा | अर्थशास्त्रियो का यह भी मानना था कि 25 साल बाद बजट पेश कर रहे प्रणब मुखर्जी अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और सरकार पर घटक दलो का दबाव ना होने का लाभ उठाते हुए आर्थिक व सामाजिक जगत को आश्चर्यचकित कर सकते हें | आर्थिक मंदी से हताश उधोग जगत और रोजमर्रा की ज़रूरी वस्तुओं की बढ़ती क़ीमतें और साथ ही साथ बेरोज़गारी से जूझती जनता की 6 जुलाई 2009 को पेश आम बजट से काफ़ी आशायें थी | क्या वित्त मंत्री इन आशाओ पर खरे उतरे; क्या वो उधोग जगत को आर्थिक मंदी से उबरने का कोई जादूई मंत्र दे पाए; आम आदमी को बजट से क्या फ़ायदा होगा; टॅक्स में क्या फेरबदल होगा; क्या सस्ता होगा और क्या महँगा; आइए विस्तार से इस पर एक नज़र डालते हें |
प्रणव मुखर्जी देश के ऐसे पहले वित्त मंत्री हैं, जिन्होंने एक ही साल में चुनाव से पहले और चुनाव के बाद बजट पेश किया। पिछली बार प्रणव मुखर्जी ने 1984 में बजट पेश किया था तब उन्होने अपने सूझबूझ भरे बजट के द्वारा आर्थिक सुधारों की आधारशिला रखी थी तब उन्हें यूरोमनी पत्रिका के सर्वे में 1984 में दुनिया का सर्वश्रेष्ठ वित्त मंत्री बताया गया था | शायद यह भी एक कारण था की सभी लोगों को 2009-10 के बजट से काफ़ी अपेक्षायें थी और आशा थी एक मॅजिक बजट की | अगर हम गौर से देखे तो पाएँगे कि वित्त मंत्री की राह एकदम आसान नही थी और उनकी अनगिनत समस्याएं थी - आर्थिक वृद्धि दर, उद्योग जगत को बड़ावा, कृषि के शेत्र में विकास, मंदी की मार, बेरोज़गारी, महगाई, सरकारी घाटा और ना जाने क्या क्या | आम बजट में रोजगार और विकास को बढावा देने के साथ सभी वर्गों को राहत देने की कोशिश की गयी है | ऐसा आम बजट बनाना संभव नहीं जो समाज के सभी वर्गो को समान भाव से संतुष्ट कर सके-और कम से कम मंदी के इस दौर में तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं।हमारे अनुसार अपेक्षाओं के बढ़े बोझ, और मंदी से जूझती अर्थव्यवस्था के इस दौर में अनुभवी राजनेता प्रणब मुखर्जी ने कुल मिलाकर एक संतुलित बजट पेश किया है।
कर ढांचे व कर सीमा में बदलाव
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने देश के कर ढांचे में चार साल के भीतर बदलाव लाकर उसे सरल और छूट मुक्त स्वरूप प्रदान करने का वादा किया। आयकर विभाग से एक आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिये एक नया सरल फॉर्म सरल-2 लाने के लिए कहा गया है |
आयकर सीमा में छूट की आम लोगों को काफ़ी उम्मीद थी लेकिन प्रणब मुखर्जी ने आयकर की सीमा में आने वालों को 10 हजार रुपए की छूट देने की बात कही है। इसके अंतर्गत अब 1 लाख 90 हजार रुपए सालाना आय के नीचे की वाली महिलाओं व 1 लाख 60 हजार रुपए से नीचे वाले पुरुषों को कोई कर नही चुकाना होगा | पहले यह सीमा 1,80,000 व 1,50,000 रुपए क्रमश: थी। वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयकर सीमा 2 लाख 40 हजार रुपए कर दी गई है। पहले बुजुर्गों को 2 लाख 25 हजार रुपए तक थी।
जीवन रक्षक दवाओं पर आयात शुल्क घटाया
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कुछ चुनिंदा जीवन रक्षक दवाओं पर आयात शुल्क घटाया है। इसके तहत इंफ्लुएंजा की वैक्सीन के अलावा नौ विशेष जीवन रक्षक दवाओं पर लगने वाले आयात शुल्क को 10 प्रतिशत से घटा कर पांच प्रतिशत कर दिया है। ये दवाएं स्तन कैंसर, हेपेटाइटिस-बी, रूमेटिक आर्थराइटिस जैसी बीमारियों के इलाज में काम आती हैं। इन दवाओं को बनाने के लिए जरूरी रसायन के थोक आयात को भी आयात शुल्क से छूट के दायरे में शामिल किया गया है। साथ ही यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि देश में उत्पादन की स्थिति में इन दवाओं पर उत्पादन शुल्क अथवा काउंटरवैलिंग शुल्क नहीं लगेगा। उन्होंने हृदय रोगों के इलाज में प्रयोग की जाने वाली दो मशीनों के आयात शुल्क को भी 7.5 प्रतिशत से घटा कर पांच प्रतिशत किया गया है। देश में निर्माण की स्थिति में इन मशीनों पर उत्पाद या काउंटरवैलिंग टैक्स नहीं लगेगा।
राष्ट्रमंडल खेलों को प्राथमिकता
प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रमंडल खेलों के लिए बजट का आवंटन 3472 करोड़ करने का प्रस्ताव किया। अंतरिम बजट में राष्ट्रमंडल खेलों के लिए 2112 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। लोकसभा में 2009-10 के लिए बजट पेश करते हुए वित्तामंत्री मुखर्जी ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेल देश की उभरती एशियाई ताकत के रूप में हमारी क्षमता को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करते हैं। राष्ट्रमंडल खेल अगले वर्ष अक्तूबर में राजधानी दिल्ली में आयोजित किए जाने हैं।
आम बजट में दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस, दिल्ली मेट्रो और राष्ट्रमंडल खेलों के लिए कुल मिलाकर 10777 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। खेलों का आयोजन करने जा रही दिल्ली सरकार को मिलने वाली केंद्रीय सहायता में तीन गुनी वृद्धि हुई है।
भारत निर्माण की झलक
किसानों, गरीबों, महिलाओं और सामाजिक क्षेत्र पर बजट में विशेष घ्यान दिया गया है। भारत निर्माण की योजनाओं और नरेगा में आवंटन बढाया गया है। जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन के तहत आवंटन को बढ़ाकर 3973 करोड़ रुपये किया गया है। इसमें राजीव आवास योजना के लिए आवंटन का प्रावधान भी शामिल है।
बृहन्मुंबई वर्षा जल संचयन परियोजना का काम तेजी से आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय बजट में 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है जो अंतरिम बजट में आवंटित राशि से 300 करोड़ रुपये अधिक है। ग्रामीण सड़कों के लिए कुल बजटीय समर्थन 12,000 करोड़ रुपये होगा। इसमें से 1067 करोड़ रुपये पूर्वोत्तर क्षेत्र और सिक्किम के लिए हैं। इस प्रकार आवंटन में 59 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
भारत निर्माण के तहत छह महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ग्रामीण सड़कों की पहचान की गई है, जो कनेक्टिविटी प्रदान करती हैं। 1000 से अधिक की आबादी वाले गांवों और 500 से अधिक की आबादी वाले पहाड़ी एवं आदिवासी इलाकों को 2009 के अंत तक सड़क संपर्क प्रदान किया जाएगा।
भारत निर्माण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मुखर्जी ने 1,46,185 किलोमीटर लंबी सडकों का निर्माण 2009 के अंत तक करने का फैसला किया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना के ऋण के तहत 6500 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
जवाहर लाल नेहरू शहरी विकास मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत शहरी आधारभूत ढांचे के लिए चल रहे काम को तेज करने के लिए बजट में 87 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए वर्तमान बजट में 12,887 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बजट में गरीबों के लिए चल रही इंदिरा आवास योजना के मद में 2,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं जबकि ग्रामीण आवासीय योजनाओं के लिए 2,000 करोड़ रुपए की विशेष राशि रखी गई है।
रक्षा बजट में 34 प्रतिशत की बढ़त
छठे वेतन आयोग को लागू करने का असर रक्षा क्षेत्र के बजट आवंटन पर साफ नजर आ रहा है। आम बजट 2009-10 में रक्षा हेतु 1,41703 करोड़ रूपए मंजूर किए गए हैं। इसी के साथ कई सालों से लंबित एक पद एक पेंशन योजना का प्रावधान भी दिया गया है। अद्धसैनिक बल हेतु 1 लाख नए घर बनाने की बात भी प्रणब मुखर्जी ने कही है। पिछले वर्ष की तुलना में रक्षा हेतु 34 प्रतिशत ज्यादा बजट रक्षा हेतु रखा गया है। सरकार ने देश की आतंरिक सुरक्षा हेतु पुलिस महकमें के आधुनिकरण के लिए 430 करोड़ रूपए मंजूर किए हैं।
यहाँ पर यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि 2007-08 में रक्षा बजट 96,000 करोड़ रुपये था, जिसमें 10 फीसद की वृध्दि कर इसे 2008-09 में 1,05,600 करोड़ रुपये किया गया।
प्रिंट मीडिया को राहत
प्रिंट मीडिया को राहत दी गयी है और विज्ञापन प्रोत्साहन पैकेज की समय सीमा और छह माह बढ़ाकर इस साल 31 दिसंबर तक कर दी गयी है। सरकार ने इस साल फरवरी में समाचारपत्रों को दिए जाने वाले डीएवीपी के सरकारी विज्ञापनों की दर में 10 फीसदी की वृद्धि की थी। साथ ही एजेंसी का 15 फीसदी कमीशन माफ कर दिया था।
बिजली क्षेत्र का आवंटन
सरकार ने त्वरित बिजली विकास एवं सुधार कार्यक्रम के लिए आवंटन को 160 प्रतिशत बढाकर 2,080 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया है।
यह बिजली की माँग और आपूर्ति के अंतर को पाटने में महत्वपूर्ण है।
प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष कर में बदलाव
सरकार ने 45 दिन के भीतर प्रत्यक्ष कर कोड पेश करने का वायदा किया है जो कर ढांचे को सरल बनाएगा इसके साथ ही अप्रत्यक्ष करों के संबंध में एक अप्रैल 2010 से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की सुचारू शुरूआत करने की प्रक्रिया में तेजी लाकर ढांचागत परिवर्तनों को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है | देश में दोहरे जीएसटी माडल को लागू किया जाएगा। इसके तहत वस्तुओं या सेवाओं पर केंद्रीय जीएसटी [सीजीएसटी] और राज्य जीएसटी [एसजीएसटी] लागू किए जाएंगे।
वित्त मंत्री ने सोमवार को कुछ नए क्षेत्रों पर सेवा कर लगाने का भी ऐलान किया है। कानूनी सलाह से संबंधित सेवा देने वाली ला फर्म को सेवा कर [सर्विस टैक्स] देना होगा। व्यक्तिगत स्तर पर कानूनी सलाह सेवा देने वालों पर यह नियम लागू नहीं होगा। भारतीय रेलवे से ढोए जाने वाले उत्पादों पर भी सेवा कर लगा दिया गया है। इसी तरह से अंतर्देशीय जलमार्गो की ढुलाई को भी सेवा शुल्क के दायरे में लाया गया है।
खेती की विकास दर को चार प्रतिशत तक पहुंचाने का संकल्प
किसानों को सरकार ने बजट में सस्ती दर पर बैंक कर्ज मुहैया कराने के उपाय किए हैं। इतना ही नहीं, जो किसान पिछले साल की कर्ज माफी योजना का लाभ अब तक नहीं उठा पाए हैं, उन्हें छह माह की और मोहलत दी गई है। सिंचाई योजना के लिए भी सरकार ने एक हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया है।
बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने खेती की विकास दर को चार प्रतिशत तक पहुंचाने का संकल्प दुहराया है। मुखर्जी ने पिछले वित्त वर्ष 2008-09 में वितरित किए गए 2.87 लाख करोड़ रुपये के कृषि कर्ज को चालू वित्त वर्ष 2009-10 में बढ़ाकर 3.25 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। तीन लाख रुपये तक के फसली कर्ज पर ब्याज की दर पूर्व की भांति सात प्रतिशत वार्षिक ही रहेगी। तथा जो किसान बैंक से लिए कर्ज का भुगतान समय पर कर देंगे, उनकी ब्याज दर में एक प्रतिशत की सीधी कटौती कर दी जाएगी और उन्हें छह प्रतिशत की ब्याज दर पर ही लोन मिलेगा। सरकार ने इस एक प्रतिशत की छूट के लिए 411 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया है।
अन्य प्रमुख घोषणाए
संपत्ति कर की सीमा 15 लाख सेबढ़ाकर ३० लाख रूपए कर दी गयी है।
पहली बार देश का बजट 10 लाख करोड़ रुपये को पार किया है। चालू वित्त वर्ष में अनुमानित 10 लाख 20,838 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है |
वित्त मंत्री मुखर्जी ने सरकार की इस इच्छा का जिक्र किया है कि वह अब किसानों को सीधे सब्सिडी देने की नीति लागू करने पर विचार कर रही है।
कमजोर वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा हासिल करने में सक्षम बनाने के लिए ऋण मोहया कराया जाएगा
सभी राज्यों में कम से कम एक केंद्रीय विश्वविद्यालय होगा
हर साल 1.2 करोड़ नई नौकरियां पैदा करने के अलावा वर्ष 2014 तक गरीबी को घटाकर आधी की जाने का प्रयास किया जाएगा
देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक आर्थिक मंदी के नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए 1.86 हजार करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की है।
निर्यातोन्मुखी इकाइयों को सस्ती दर पर लोन मोहया कराया जाएगा
राजकोषीय घाटा 2.7 प्रतिशत से बढ़कर 6.8 प्रतिशत।
निगमित कर में कोई बदलाव नहीं।
राजमार्गों के लिए आवंटन में 23 प्रतिशत बढ़ोतरी।
पेट्रो क्षेत्र में कर छूट प्राकृतिक गैस पर भी।
विशेष पहचान कार्ड परियोजना के लिए 120 करोड़ रुपये का प्रावधान।
जलवायु परिवर्तन पर योजना के तहत आठ मिशन शुरू होंगे।
श्रीलंकाई तमिलों के पुनर्वास के लिए 500 करोड़ रुपये।
पश्चिम बंगाल के चक्रवात प्रभावित इलाकों के लिए विशेष आवंटन।
शेयर बाजार की प्रतिकिर्या
प्रणब मुखर्जी ने भले ही आम आदमी के लिए बजट में काफ़ी गुंजाइश रखी हो लेकिन बाज़ार को उनका बजट पसंद नहीं आया. बजट भाषण के साथ ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज बुरी तरह से लुडक गया | उद्योग जगत के लिए बजट में कुछ नहीं होने की आशंका से ग्रस्त देश के शेयर बाजारों की प्रतिकिर्या देखने लायक है | जानकारों का कहना है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष 2009-2010 में में वित्तीय घाटा बढ़ कर 6.8 फ़ीसदी हो गया है और शायद इसकी वजह से बाज़ार में लोगों का भरोसा घटा है. पिछले साल वित्तीय घाटा 6.2 प्रतिशत था.
आश्चर्य है कि भारतीय उद्योग जगत द्वारा लम्बे समय से की जा रही मांग को पूरा करते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने फ्रिंज बेनेफिट टैक्स (एफबीटी) और कमोडिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (सीटीटी) को समाप्त कर दिया लेकिन फिर भी शेयर बाजार को बजट रास नही आया
चलते चलते: क्या सस्ता, क्या महंगा
बजट भले ही बहुत ज्यादा प्रभावी नहीं दिख रहा है, लेकिन प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कई वस्तुओं के दाम घटेंगे और कई के दाम बढ़ेंगे। आइए एक नज़र डालते हें |
क्या-क्या होगा सस्ता:
एलसीडी की कीमतें घटेंगी। जीवन रक्षक दवाएं, ब्रांडेड ज्वेलरी, सीएफएल बल्ब, मकान, वॉटर प्यूरीफायर, बायोडीजल, कंबल, कालीन, प्रेशर कूकर, ट्यूबलाइट, मोबाइल फोन, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, खेल उपकरण, चमड़े के उत्पाद, जूते-चप्पल, लक्जरी कारें, कंप्यूटर, आदि सस्ते होंगे।
क्या-क्या महंगा होगा:
सेट टॉप बॉक्स, सोना, चांदी, कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट्स, कपड़े, कागज, गत्ता, कॉटन, किचन अप्लाइंसेस, आदि महंगे होंगे।
Monday, July 6, 2009
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bahut sahi !
ReplyDeletebahut khoob !
aajkal to budget aate hee rahate hain. narayan narayan
ReplyDeleteहिंदी भाषा को इन्टरनेट जगत मे लोकप्रिय करने के लिए आपका साधुवाद |
ReplyDeleteबहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
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